भीड़ में खुद
को पहचानो,
वरना भीड़ तुम्हें निगल जायेगी !
जरूरी नहीं कि तुम्हारी पहचान भीड़ से बिलकुल जुदा हो,
पर फिर भी खुद को पहचानो !
भीड़ का क्या ?
इसकी पहचान बदलते देर नहीं लगती !
क्या पता तुम्हें जाना हो दिल्ली और भीड़ बॉम्बे की ओर मुड़ जाए,
ऐसे में तुम्हारी पहचान तुम्हारा साथ देगी !
वरना भीड़ तुम्हें निगल जायेगी !
जरूरी नहीं कि तुम्हारी पहचान भीड़ से बिलकुल जुदा हो,
पर फिर भी खुद को पहचानो !
भीड़ का क्या ?
इसकी पहचान बदलते देर नहीं लगती !
क्या पता तुम्हें जाना हो दिल्ली और भीड़ बॉम्बे की ओर मुड़ जाए,
ऐसे में तुम्हारी पहचान तुम्हारा साथ देगी !
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